Narsimha Puran

09 Nov
2017

नरसिंह पुराण

श्री नरसिंह पुराण महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित यह भारतीय ग्रंथ समूह पुराण से जुड़ा है, यह एक उपपुराण है। आर° सी° हाज़रा के शोध[1] के अनुसार यह 5वी शताब्दी के बाद के हिस्से में लिखा गया था तथा इसका तेलुगू संस्करण 1300 ई° के बाद का है।

विषय वस्तु

इसके पुस्तक.. संस्करण में 68 अध्याय तथा 3,464 श्लोक हैं, 8वां अध्याय यम गीता के तीन संस्करणों में से एक है। अध्याय 36 से 54 तक भगवान विष्णु के 10 अवतारों का विस्तारपूर्वक वर्णन है। 21वें और 22वें अध्याय में सूर्यवंश तथा सोम वंश का वर्णन है इनके अंत में महाराज शुद्धोदन के पुत्र भगवान गौतम बुद्ध तथा क्षेमक का वर्णन है। 41 से 44 अध्याय तक नरसिंहावतार कथा, 47 से 52 तक राम कथा और 53 वे अध्याय में भगवान कृष्ण की कथा सारगर्भित है। अध्याय 57 से 61 तक स्वतंत्र लेख हैं जिसे हरित संहिता अथवा लघुहरित स्मृति कहते हैं

अध्यायों के नाम

इस पुराण में कुल 68 अध्याय हैं जिनके नाम निम्नांकित हैं[3]:—

सर्गनिरूपण
सर्गरचना
सृष्टि रचना प्रकार
नाम नहीं।
सृष्टि कथन
पुंसवन आख्यान
मार्कण्डेय मृत्युंजय
यमगीता
नाम नहीं
मार्कण्डेय चरित
मार्कण्डेय चरित
यमीय संवाद
ब्रह्मचारी संवाद
नाम नहीं।
नाम नहीं।
विष्णो: स्तवराजनिरूपण
अष्टाक्षर महात्म्य
अश्विनी उत्पत्ति
नाम नहीं।
नाम नही।
सूर्यवंश कथन
सोमवंश कीर्तन
नाम नहीं।
इक्ष्वाकु चरित
इक्ष्वाकु चरित
सुर्यवंश चरित
सोमवंश वर्णन
शंतनुचरित्र
शंतनुसंतति
भूगोलकथन
नाम नहीं।
सहस्रानीक चरित
सहस्रानीक चरित्र, मार्कण्डेय एन उपदिष्ट सम्मार्जनोफलं
सहस्रानीक चरित, श्री विष्णुपूजा विधि
लक्षहोम विधि
हरि प्रदुर्भाव अनुक्रम
मत्स्य प्रादुर्भाव
कूर्म प्रादुर्भाव
वाराह प्रादुर्भाव
विष्णोर्नामस्तोत्रम्
नरसिंह प्रादुर्भाव
नरसिंह प्रादुर्भाव
नरसिंह प्रादुर्भाव
नरसिंह प्रादुर्भाव
वामन प्रादुर्भाव
परशुराम प्रादुर्भाव
राम प्रादुर्भाव
राम प्रादुर्भाव
राम प्रादुर्भाव
राम प्रादुर्भाव
राम प्रादुर्भाव
राम प्रादुर्भाव
कृष्ण प्रादुर्भाव
कलिलक्षण कीर्तन
शुक्र वर प्रदान
प्रतिष्ठा विधि
ब्राह्मण धर्म कथन
गृहस्थधर्म
वानप्रस्थधर्म
यतिधर्म
योग अध्याय
विष्णोरर्चाविधि
सहस्रानीक चरित, आष्टाक्षर मंत्र कथन
पुण्डरीक नारद संवाद
धर्म अर्थ मोक्ष दायिनी विष्णुवल्लभे
तीर्थ प्रतिष्ठा
मानस तीर्थ व्रत
नरसिंह पुराण महात्म्य

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