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Yajur Ved

यजुर्वेद यजुर्वेद हिन्दू धर्म का एक महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ और चार वेदों में से एक है। इसमें यज्ञ की असल प्रक्रिया के लिये गद्य और पद्य मन्त्र हैं। ये हिन्दू धर्म के चार पवित्रतम प्रमुख ग्रन्थों में से एक है और अक्सर ऋग्वेद के बाद दूसरा वेद माना जाता है – इसमें ऋग्वेद के ६६३ …

SamVed

सामवेद संहिता सामवेद भारत के प्राचीनतम ग्रंथ वेदों में से एक है, गीत-संगीत प्रधान है। प्राचीन आर्यों द्वारा साम-गान किया जाता था। सामवेद चारों वेदों में आकार की दृष्टि से सबसे छोटा है और इसके १८७५ मन्त्रों में से ६९ को छोड़ कर सभी ऋगवेद के हैं। केवल १७ मन्त्र अथर्ववेद और यजुर्वेद के पाये …

RigVed

ऋग्वेद ऋग्वेद सनातन धर्म का सबसे आरंभिक स्रोत है। इसमें १०२८ सूक्त हैं, जिनमें देवताओं की स्तुति की गयी है। इसमें देवताओं का यज्ञ में आह्वान करने के लिये मन्त्र हैं, यही सर्वप्रथम वेद है। ऋग्वेद को इतिहासकार हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की अभी तक उपलब्ध पहली रचनाऔं में एक मानते हैं। यह संसार के उन सर्वप्रथम …

Atharva Ved

अथर्ववेद संहिता अथर्ववेद संहिता हिन्दू धर्म के पवित्रतम और सर्वोच्च धर्मग्रन्थ वेदों में से चौथे वेद अथर्ववेद की संहिता अर्थात मन्त्र भाग है। इसमें देवताओं की स्तुति के साथ जादू, चमत्कार, चिकित्सा, विज्ञान और दर्शन के भी मन्त्र हैं। अथर्ववेद संहिता के बारे में कहा गया है कि जिस राजा के रज्य में अथर्ववेद जानने …

Narsimha Puran

नरसिंह पुराण श्री नरसिंह पुराण महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित यह भारतीय ग्रंथ समूह पुराण से जुड़ा है, यह एक उपपुराण है। आर° सी° हाज़रा के शोध[1] के अनुसार यह 5वी शताब्दी के बाद के हिस्से में लिखा गया था तथा इसका तेलुगू संस्करण 1300 ई° के बाद का है। विषय वस्तु इसके पुस्तक.. संस्करण में …

Vishnu Puran

विष्णु पुराण ‘विष्णु पुराण’ (आईएएसटी: विंदू पुराणा) अठारह महापुराओं में से एक है, जो हिंदू धर्म के प्राचीन और मध्ययुगीन ग्रंथों की एक शैली है। [1] यह वैष्णववाद साहित्य संगठित में एक महत्वपूर्ण पंचरात का पाठ है। [1] [2] विष्णु पुराण की पांडुलिपियों आधुनिक युग में कई संस्करणों में बचे हैं। [3] [4] [5] किसी …

Varah Puran

वराह पुराण पुराण साहित्य भारतीय साहित्य और जीवन की अक्षुण्ण निधि है। इसमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएँ मिलती हैं। अठारह पुराणों में अलग अलग देवी-देवताओं को केन्द में रखकर पाप और पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म और अकर्म की गाथाएं कहीं गई हैं। इस रूप में पुराणों का पठन और …

Vaman Puran

वामन पुराण वामन पुराण में मुख्यरूप से भगवान विष्णु के दिव्य माहात्म्य का व्याख्यान है। विष्णु के वामन अवतार से संबंधित यह दस हजार श्लोकों का पुराण शिवलिंग पूजा, गणेश -स्कन्द आख्यान, शिवपार्वती विवाह आदि विषयों से परिपूर्ण है। इसमें भगवान वामन, नर-नारायण, भगवती दुर्गा के उत्तम चरित्र के साथ भक्त प्रह्लाद तथा श्रीदामा आदि …

Brahma Vaivarta Purana

ब्रह्मा वैश्य पुराण ब्रह्मवार्ता पुराण (संस्कृत: ब्रह्मवावर्त पुराण, ब्रह्मवार्वर्ता पुराता) एक विशाल संस्कृत पाठ और हिंदू धर्म का एक प्रमुख पुराण (महापूरा) है। [1] यह कृष्ण और राधा के केंद्र में स्थित है, वैष्णववाद है, और यह आधुनिक युग पुराण में से एक माना जाता है। [2] [3] [4] यद्यपि 1 संस्करण देर से मिलेनियम …

Skand Puran

स्कन्द पुराण विभिन्न विषयों के विस्तृत विवेचन की दृष्टि से पुराणों में स्कन्दपुराण सबसे बड़ा है। भगवान स्कन्द के द्वारा कथित होने के कारण इसका नाम ‘स्कन्दपुराण’ है। यह खण्डात्मक और संहितात्मक दो स्वरूपों में उपलब्ध है। दोनों खण्डों में ८१-८१ हजार श्लोक परंपरागत रूप से माने गये हैं। खण्डात्मक स्कन्द पुराण में क्रमशः माहेश्वर, …

Shiv Puran

शिव पुराण इस पुराण में परात्पर ब्रह्म शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान …

Padma Puran

पद्म पुराण महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित संस्कृत भाषा में रचे गए अठारण पुराणों में से एक पुराण ग्रंथ है। सभी अठारह पुराणों की गणना में ‘पदम पुराण’ को द्वितीय स्थान प्राप्त है। श्लोक संख्या की दृष्टि से भी इसे द्वितीय स्थान रखा जा सकता है। पहला स्थान स्कंद पुराण को प्राप्त है। पदम का अर्थ …