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Bhagavad Gita Slokas

1. यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्‍क्षति। शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥12.17॥ भावार्थ : जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना करता है तथा जो शुभ और अशुभ सम्पूर्ण कर्मों का त्यागी है- वह भक्तियुक्त पुरुष मुझको प्रिय है । 2. न हि …

Slokas

भगवद गीता दुनिया का सबसे बड़ा ग्रंथ माना जाता है !धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, अतः प्रतिवर्ष इस तिथि को गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है ! मौजूदा समय में गीता ही …

Geeta Updesh

गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त कर्म यानी ‘फल की इच्छा किए बिना कर्म’ करने की प्रेरणा दी। इसका प्रमाण उन्होंने अपने निजी जीवन में भी प्रस्तुत किया। मथुरा विजय के बाद भी उन्होंने वहां शासन नहीं किया। कला से प्रेम करो : संगीत व कलाओं का हमारे जीवन में विशिष्ट …

Geeta Saar

गीता सार हिंदी में • क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है। • जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न …